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Showing posts from May, 2023

महापुरुष (उदात्त जीवन की ओर)

                                                                                                                                          ~ केशव प्रथमवीर हम सभी जानते हैं कि विद्यालयों में विभिन्न क्षेत्रों के महापुरुषों की जयंतियाँ या पुण्य तिथियाँ मनाईं जाती हैं| ज्ञान-विज्ञान, समाज, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, धर्म-दर्शन, राजनीति आदि के क्षेत्र में ऐसे हजारों-लाखों महान व्यक्ति हुए हैं, जिनको उनकी जयंतियों तथा पुण्य तिथियों के अवसरों पर याद किया जाता है और बच्चों के कोमल मन पर यह अंकित करने का प्रयास किया जाता है कि उन्हें भी इन महापुरुषों का अनुकरण करना चाहिए| लेकिन विश्व के इतिहास पर दृष्टिपात...

सुदामा चरित्र (By : Dr. Keshav Prathamvir)

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हमारी सामाजिक व्यवस्था में ‘मित्र भाव’ का भी अनन्य महत्त्व है | हमारे ‘रामायण’, ‘महाभारत’ तथा श्रीमद् भागवत जैसे महाकाव्यों में आदर्श मित्रता के संबंध में, हम “सुग्रीब और राम” की मित्रता तथा “कृष्ण और सुदामा” की मित्रता के किस्से सुनते आए हैं | महाकवि तुलसीदास कहते हैं- “लेत-देत मन शंक न धरईं| बल अनुमान सदा हित करईं| बिपति काल कर सतगुन नेहा| श्रुति कह संत मित्र गुण एहा|”  अनेक हिन्दी कवियों ने भी कृष्ण-सुदामा की मित्रता को अपने काव्य का विषय बनाया है| किन्तु कविवर नरोत्तमदास द्वारा रचित “सुदामाचरित”  ने जो लोकप्रियता प्राप्त की है, वह किसी अन्य कवि को प्राप्त नहीं हुई| हिन्दी के जिन कवियों ने बहुत कम लिख कर अपार ख्याति प्राप्त की , उन थोड़े से साहित्यकारों में नरोत्तमदास जी का नाम भी , आदर के साथ स्मरण किया जाता है|  इस कृति को या इसके किसी अनुभाग को अनेक प्रान्तों के शिक्षा संगठन , अपने पाठ्यक्रमों में समाहित करते रहे हैं | यहाँ इस काव्य की कुछ कथागत विशेषताओं पर संक्षिप्त में प्रकाश डालने का प्रयास किया जा रहा है|   श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर...

भारत का लौहपुरुष: सरदार पटेल

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               कभी-कभी किसी नाम के पूर्व का विशेषण किसी व्यक्ति विशेष के नाम के साथ इतना लोकप्रिय हो जाता है कि वह फिर किसी अन्य नाम के साथ उतना आकर्षक नहीं लगता| इतिहास पर नजर डाली, स्वतंत्रता से पूर्व इस देश में राजा-महाराजाओं की कमी नहीं थी| किन्तु ‘राणा’ शब्द के सुनते ही महाराणा प्रताप की अश्वारोही मूर्ति दिखाई देने लगती है| ‘छत्रपति’ के साथ ही मर्द मराठा ‘शिवाजी महाराज’ और इसी तरह ‘महात्मा’ शब्द सुनते ही गांधीजी की आकृति मानस पटल पर उभर आती है| भले ही इस देश में महात्मा नामधारी व्यक्तियों की असंख्य टोलियाँ घूमती हैं| इसी तरह देश में नेताओं की कमी नहीं है| सफेद, लाल नीली, आदि विभीन्न रंगों की टोपियों के साथ यहाँ हर गली-मोहल्ले में कम से कम एक नेताजी तो होता ही है| किन्तु ‘नेताजी’ शब्द के साथ आजाद हिन्द फौज के अधिनायक ‘बाबू सुभाषचंद्र बोस’ की सैनिक सलामी स्वीकारने वाली मूर्ति प्रकट हो जाती है| साथ ही उभर आते हैं उस काल खंड की हवा में गूंजने वाले कुछ शब्द- ‘जयहिंद’, ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’, चलो दिल्ली, ‘कदम-कदम बढाए जा..’आदि...